कारीला धाम

जानकी माता मदिंर

इतिहास और धार्मिक महत्व:

  • लव-कुश की जन्मस्थली: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम द्वारा माता सीता का त्याग किए जाने के बाद, वे महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रुकी थीं। यह आश्रम इसी करीला की पहाड़ी पर स्थित था। यहीं पर माता सीता ने अपने दो पुत्रों, लव और कुश को जन्म दिया था।
  • राम के बिना सीता की पूजा: यह संभवतः देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ माता सीता की पूजा भगवान राम के बिना की जाती है। मंदिर में माता सीता के साथ उनके पुत्र लव-कुश और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमाएं स्थापित हैं।

मुख्य आकर्षण – रंगपंचमी का मेला और राई नृत्य:

  • हर साल रंगपंचमी (होली के पांच दिन बाद) के अवसर पर यहाँ एक विशाल मेला लगता है।
  • ऐसी मान्यता है कि जब लव-कुश का जन्म हुआ था, तब स्वर्ग से अप्सराओं ने आकर नृत्य किया था। उसी परंपरा को निभाते हुए, मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु यहाँ नृत्यांगनाओं द्वारा ‘राई नृत्य’ करवाते हैं।

कैसे पहुँचें:

यह मंदिर अशोकनगर से लगभग 35 किमी और विदिशा से लगभग 80 किमी की दूरी पर स्थित है।